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घोषणाएं
दिसंबर और जनवरी !!
श्री रंगजी मंदिर प्रत्यक्ष वैकुंठ बन जाता है |भगवान जी की सवारी विभिन्न अलंकारों में, हर्ष, उल्हास, भजन, कीर्तन, शुभ मंत्र, झूमर, प्रकाश, प्रसाद |
16 दिसंबर शुभ धनुर्मास व्रत प्रारम्भ।
20 दिसंबर श्रीअध्ययन उत्सव प्रारम्भ।
शाम: जगमोहन मंडप में सभी आचार्यों, अलवरों और भगवान के दर्शन दोपहर 3 बजे
से।
30 दिसंबर वैकुंठ एकादशी.
वैकुंठ द्वार एकादशी की सुबह के शुरुआती घंटों में भक्तों के लिए खुलता है।
30 दिसंबर-8 जनवरी
वैकुंठ उत्सव
हर शाम: वैकुंठ मंडप में अलग-अलग अलंकार में भगवान जी की सवारी और दर्शन।
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पूर्व उत्सव
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